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आर्ष - अनार्ष निर्णय

Swami Dayanand Sarswati Ji April 03, 2021

वेद – 

केवल वेद ही हमारे धर्मग्रन्थ हैं ।

वेद संसार के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं ।

 वेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में परमात्मा ने 

अग्नि , वायु , आदित्य और अंगिरा – इन चार ऋषियों को समाधि की अवस्था में एक साथ दिया था ।

 

वेद पढने-सुनने का अधिकार सभी मनुष्यों को है।

 

 

वेद चार हैं ----

 

१. ऋग्वेद – इसमें तिनके से लेकर ब्रह्म–पर्यन्त सब पदार्थो का ज्ञान दिया हुआ है ।

 

इसमें १०,५५२ अथवा १०५८९ मन्त्र हैं । 

 

मण्डल –१०. 

 

सूक्त-१०२८ 

 

शाखा –२०

 

ब्राह्मण - ऐतरेय

 

उपवेद – आयुर्वेद

 

मूलवेद - शाकल शाखा 

मन्त्र-उच्चारण - शीध्र-वृत्ति

 

२. यजुर्वेद – इसमें कर्मकाण्ड है । इसमें अनेक प्रकार के यज्ञों का वर्णन है ।

 

इसमें १,९७५ मन्त्र हैं।

 

अध्याय – ४०

 

शाखा - १००

ब्राह्मण – शतपथ

 

उपवेद - धनुर्वेद

 

मूलवेद - माध्यन्दिनी शाखा 

मन्त्र-उच्चारण - मध्यम-वृत्ति

 

३. सामवेद – यह उपासना का वेद है।

 

इसमें १,८७५ मन्त्र हैं ।

 

ब्राह्मण – ताण्ड्य या छान्दोग्य ब्रह्मण ।

 

शाखा - ९९९

उपवेद - गान्धर्ववेद

 

मन्त्र-उच्चारण - विलम्बित-वृत्ति

मूलवेद - कौथुमी शाखा

 

४. अथर्ववेद –इसमें मुख्यतः विज्ञान–परक मन्त्र हैं ।

 

इसमें ५,९७७ मन्त्र हैं ।

 

काण्ड - २०

 

सूक्त-७३१

 

शाखा - 8

ब्राह्मण – गोपथ

 

उपवेद - अर्थवेद

 

मन्त्र-उच्चारण - शीध्र-वृत्ति

मूलवेद - शौनक शाखा

 

उपवेद – चारों वेदों के चार उपवेद हैं । क्रमशः – आयुर्वेद , धनुर्वेद , गान्धर्ववेद और अर्थवेद (स्थापत्यवेद) ।

 

उपनिषद – प्रामाणिक उपनिषदों की कुल संख्या ११ ही हैं । इनके नाम हैं --- ईश , केन , कठ , प्रश्न , मुण्डक , माण्डूक्य , तैत्तिरीय , ऐतरेय , छान्दोग्य , बृहदारण्यक और श्वेताश्वतर ।

 

ब्राह्मणग्रन्थ – इनमें वेदों की व्याख्या है । 

चारों वेदों के प्रमुख ब्राह्मणग्रन्थ ये हैं ---

ऐतरेय , शतपथ , ताण्ड्य और गोपथ ।

 

 (उपांग)– दर्शन छह हैं – न्याय , वैशेषिक , सांख्य , योग , मीमांसा और वेदान्त ।

 

स्मृति – प्रक्षिप्त श्लोकों को छोङकर मनुस्मृति ही प्रमाणिक स्मृति है । 

 

वेदों के छह वेदांग – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त+निघंटु, छन्द, ज्योतिष ।

 

वेदों के छह उपांग (दर्शनशास्त्र) – जिन को छः दर्शन या छः शास्त्र भी कहते हैं ।

 

१. कपिल का सांख्य

 

२. गौतम का न्याय

 

३. पतंजलि का योग

 

४. कणाद का वैशेषिक

 

५. व्यास का वेदान्त

 

६. जैमिनि का मीमांसा

 

इनके अतिरिक्त आरण्यक , धर्मसूत्र , गृह्यसूत्र , अर्थशास्त्र , विमानशास्त्र आदि अनेक ग्रन्थ हैं ।