सत्य और असत्य का विवेक, धर्म और अधर्म की व्याख्या, प्रभु से मिलने का मार्ग-दर्शन यदि किसी ग्रन्थ में एक स्थान पर खोजना हो तो वह ग्रन्थ है सत्यार्थप्रकाश ।
सत्यार्थप्रकाश ‘सत्य’ का ऐसा प्रकाश स्तम्भ है जिसे पढ़कर मन और मस्तिष्क पर छाया अज्ञान-तिमिर स्वतः समाप्त हो, ज्ञान और सत्य प्रकट होकर, अन्तर को आलोक से भर देता है। धर्म के नाम पर अधर्म, पुण्य के नाम पर पाप और सत्य के नाम पर असत्य तभी तक कहीं रह सकता है जब तक कि वहाँ ‘सत्यार्थप्रकाश’ नहीं पहुँचा।
वस्तुतः आज भटके हुए मानव समुदाय को मृत्यु-मार्ग से हटाने और जीवन-पथ पर चलाने की सामर्थ्य यदि किसी एक ग्रन्थ में है तो वह है ‘सत्यार्थप्रकाश’।
‘सत्यार्थप्रकाश’ उस महान् व्यक्ति की रचना है जिसने जीवनभर कभी असत्य से समझौता नहीं किया, जिसके मन में कभी किसी के प्रति एक पल के लिए भी द्वेष नहीं उभरा, जो मनुष्यमात्र के उत्थान और कल्याण के लिए मृत्युपर्य्यन्त संघर्ष रत रहा। जिसके हृदय में सभी के प्रति माँ की ममता और स्नेह का सागर उमड़ता था।
Paperback192 PagesEdition 2024ISBN field_64eda14e688caIn StockOriginal Publisher Edition
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बाइंडिंग: Paperback | पृष्ठ: 192 | संस्करण वर्ष: 2024 | ISBN: field_64eda14e688ca | वज़न: लगभग 125 ग्राम। यह जानकारी उत्पाद पृष्ठ पर दर्ज वास्तविक विवरण पर आधारित है।
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