
आश्रम-व्यवस्था
आश्रम-व्यवस्था वैदिक संस्कृति में मानव जीवन का संतुलन, पुरुषार्थ और आत्मोन्नति का चतुर्विध सोपान चित्र १: आश्रम-व्यवस्था के चार प्रमुख चरण — ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ
वेद ऋषि क्या है? जानिए वैदिक एवं सनातन साहित्य का विश्वसनीय केंद्र
वेद ऋषि क्या है? जानिए वैदिक एवं सनातन साहित्य का विश्वसनीय केंद्र वेद ऋषि (VedRishi.com) वैदिक एवं सनातन साहित्य के प्रचार-प्रसार और पुस्तकों को पाठकों
The Need for a Reservation-Free India •
The Need for a Reservation-Free India • ——————————– A serious question confronts the country today: Is the reservation system in education and employment a permanent
आचरण के छिद्र
आचरण के छिद्र -डॉ० रूपचन्द्र ‘दीपक’ प्रधान आर्य समाज श्रृंगारनगर, लखनऊ यन्मे छिद्रं चक्षुषो हृदयस्य मनसो वातितृण्णं बृहस्पतिर्मे तद्दधातु।शं नो भवतु भुवनस्य यस्पति:। -यजुर्वेद ३६/२

वासना, व्यसन, व्यभिचार और भोगवादी जीवनशैली: मानवता के समक्ष एक गंभीर चुनौती
वासना, व्यसन, व्यभिचार और भोगवादी जीवनशैली: मानवता के समक्ष एक गंभीर चुनौती आज का समाज जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह केवल व्यक्तिगत
अनार्ष ग्रंथ केवल तुलनात्मक अध्ययन, अनुसंधान, शैक्षिक अन्वेषण एवं बौद्धिक विमर्श
वेदऋषि द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अनार्ष ग्रंथ केवल तुलनात्मक अध्ययन, अनुसंधान, शैक्षिक अन्वेषण एवं बौद्धिक विमर्श के उद्देश्य से प्रस्तुत किए जाते हैं। इन
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यहाँ पर कुछ विशेष लेखों को ब्लॉग की रूप में प्रेषित क्या जा रहा है। विभिन्न विद्वानों द्वारा लिखे गए यह लेख हमारे लिए वैदिक सिद्धांतों को समझने में सहायक रहें गे, ऐसी हमारी आशा है।

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