आचरण के छिद्र
आचरण के छिद्र -डॉ० रूपचन्द्र ‘दीपक’ प्रधान आर्य समाज श्रृंगारनगर, लखनऊ यन्मे छिद्रं चक्षुषो हृदयस्य मनसो वातितृण्णं बृहस्पतिर्मे तद्दधातु।शं नो भवतु भुवनस्य यस्पति:। -यजुर्वेद ३६/२

वासना, व्यसन, व्यभिचार और भोगवादी जीवनशैली: मानवता के समक्ष एक गंभीर चुनौती
वासना, व्यसन, व्यभिचार और भोगवादी जीवनशैली: मानवता के समक्ष एक गंभीर चुनौती आज का समाज जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह केवल व्यक्तिगत
अनार्ष ग्रंथ केवल तुलनात्मक अध्ययन, अनुसंधान, शैक्षिक अन्वेषण एवं बौद्धिक विमर्श
वेदऋषि द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अनार्ष ग्रंथ केवल तुलनात्मक अध्ययन, अनुसंधान, शैक्षिक अन्वेषण एवं बौद्धिक विमर्श के उद्देश्य से प्रस्तुत किए जाते हैं। इन
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यहाँ पर कुछ विशेष लेखों को ब्लॉग की रूप में प्रेषित क्या जा रहा है। विभिन्न विद्वानों द्वारा लिखे गए यह लेख हमारे लिए वैदिक सिद्धांतों को समझने में सहायक रहें गे, ऐसी हमारी आशा है।
आचरण के छिद्र
आचरण के छिद्र -डॉ० रूपचन्द्र ‘दीपक’ प्रधान आर्य समाज श्रृंगारनगर, लखनऊ यन्मे छिद्रं चक्षुषो हृदयस्य मनसो वातितृण्णं बृहस्पतिर्मे तद्दधातु।शं नो भवतु भुवनस्य यस्पति:। -यजुर्वेद ३६/२

वासना, व्यसन, व्यभिचार और भोगवादी जीवनशैली: मानवता के समक्ष एक गंभीर चुनौती
वासना, व्यसन, व्यभिचार और भोगवादी जीवनशैली: मानवता के समक्ष एक गंभीर चुनौती आज का समाज जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह केवल व्यक्तिगत
अनार्ष ग्रंथ केवल तुलनात्मक अध्ययन, अनुसंधान, शैक्षिक अन्वेषण एवं बौद्धिक विमर्श
वेदऋषि द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अनार्ष ग्रंथ केवल तुलनात्मक अध्ययन, अनुसंधान, शैक्षिक अन्वेषण एवं बौद्धिक विमर्श के उद्देश्य से प्रस्तुत किए जाते हैं। इन
