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उदारता / Generocity

उदारता / Generocity श्रीमद भगवतगीता के १६ [16] वे अध्याय के २. [2] श्लोक में श्री कृष्ण मनुष्यों में जो गुण विद्यमान होने चाहिए, उनके संबंध में बताते हुए कहते हैं:- अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् । दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ।।१६.२।। अहिंसा, सत्यभाषण, क्रोध का त्याग, संसार की कामना का त्याग, कर्मों में कर्ता होने का […]

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हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (१/९) 16 Sanskārs of Hindus – Part (1/9)

हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (१/९) संस्कार शब्द का मूल अर्थ ‘शुद्धिकरण‘ है। चरक ऋषि ने कहा है, ‘संस्कारो हि गुणान्तराधानमुच्यते‘ अर्थात पहले से विद्यमान दुर्गुणों को हटा कर उनके स्थान पर सदगुणों को स्थापित करना संस्कार कहलाता है। ‘संस्कार’ शब्द का प्रयोग हमारे मन पर पड़े भावों के लिए भी होता है। हमारी […]

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हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (४/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (4/9)

हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (४/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (4/9) शिशु अनेक योनियों में भ्रमण करता हुआ मानव शरीर में आया है, इसलिए उसके मन पर पाशविक संस्कारों की छाया रहनी स्वाभाविक है। इनको हटाया जाना आवश्यक है। यदि पशु प्रवृत्ति बनी रही, तो मनुष्य शरीर की विशेषता ही नही रहेगी। […]

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मन, उस पर पड़े संस्कार व स्वभाव (Mind, Sanskār and Swabhāv)

मन, उस पर पड़े संस्कार व स्वभाव Mind, Sanskār and Swabhāv हम हिन्दुओं के १६ संस्कारों के विषय में जानते हैं। ये संस्कार एक हिंदू के जीवन में उसके माता-पिता द्वारा उसके जन्म के आह्वान से आरम्भ हो कर उसकी मृत्यु तक जीवन-चरण की महत्ता को ध्यान में रख कर उचित समय पर किए जाते […]

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हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (६/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (6/9)

हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (६/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (6/9) शिशु के जन्म के पश्चात अभी तक उसके जीवन में मुख्यत: उसके माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्य संस्कार डाल रहे थे। एक आयु के पश्चात बालक (एवं बालिका) को शिक्षा के लिए गुरु के पास जाना होता है जिससे बालक […]

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हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (५/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (5/9)

हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (५/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (5/9) शिशु जब गर्भ में होता है तभी उसके बाल आ जाते हैं। चूँकि शिशु गर्भ में द्रव में होता है इसलिए उसके बाल भी मलिन जल में होते हैं। इन मलिन बालों को उस्तरे से जड़ तक काट देना आवश्यक है […]

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हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (७/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (7/9)

हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (७/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (7/9) गुरुकुल में रहकर, गुरु से समस्त वेद-वेदागों की शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत शिष्य जब गुरु की कसौटी पर खरा उतर जाता था तब गुरु उसकी शिक्षा पूर्ण होने के प्रतीकस्वरुप उसका समावर्तन-संस्कार करते थे। यह संस्कार एक या अनेक शिष्यों […]

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हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (८/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (8/9)

हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (८/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (8/9)   वैदिक संस्कृति ने जीवन को यात्रा माना है इसलिए उसके अनुसार व्यक्ति को आगे बढ़ते जाना है, भले वह आगे बढ़ना चाहे अथवा न चाहे। वह एक स्थान पर एक अवस्था में अधिक समय तक नहीं रह सकता। गृहस्थ में […]

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धन व सुख / Wealth and Happiness

धन व सुख / Wealth and Happiness   मन में सदा इच्छाएँ उठती रहती हैं और मन इन इच्छाओं की पूर्ति चाहता है । यदि इन इच्छाओं को पूरा नहीं किया गया तो हमें दुख होगा, मन निरंतर ऐसा आभास कराने का भी प्रयास करता रहता है। इस दुख से बचने के लिए हम इच्छा […]

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हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (९/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (9/9)

हिन्दुओं के १६ संस्कार – भाग (९/९) 16 Sanskārs of Hindus – part (9/9) वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही।। [भगवत गीता २.२२] अर्थ: जैसे मनुष्य जगत में पुराने जीर्ण वस्त्रों को त्याग कर अन्य नवीन वस्त्रों को ग्रहण करते हैं, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को […]

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