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दीपावली – रामराज्य की परिकल्पना / Deepawali – Concept of Ram-Rajay

दीपावली – रामराज्य की परिकल्पना / Deepawali – Concept of Ram-Rajay दीपावली अर्थात श्री राम की चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात घर-वापसी। प्रजा प्रसन्न है, कि उनके वांछित युवराज का अब राज्याभिषेक हो सकेगा। प्रजा श्री राम के गुणों को जानती थी और ऐसा मानती थी कि श्री राम उन्हें एक अच्छा शासन देंगे। […]

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धर्म प्रचार

धर्म प्रचार धर्म प्रचार कैसा हो?कैसा प्रचार सफल है? इसका उत्तर जानने से पूर्व हमें यह जानना चाहिए कि जो भौतिक स्वार्थ में लिप्त है उनपर किसी धर्म प्रचार का प्रभाव नहीं पड़ता। इस धरा पर कई ऐसे पतित किन्तु बुद्धिमान लोग हैं जो भौतिक स्वार्थ में इतने मदान्ध हैं कि किसी बात का उनपर […]

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आर्ष – अनार्ष निर्णय

आर्ष – अनार्ष निर्णय वेद – केवल वेद ही हमारे धर्मग्रन्थ हैं । वेद संसार के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं । वेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में परमात्मा ने अग्नि , वायु , आदित्य और अंगिरा – इन चार ऋषियों को समाधि की अवस्था में एक साथ दिया था ।   वेद पढने-सुनने का अधिकार […]

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आर्ष और अनार्ष ग्रंथ

आर्ष और अनार्ष ग्रंथ वेद ऋषि प्रकल्प द्वारा विशेषत: आर्ष ग्रंथों का ही विक्रय किया जाता रहा है किंतु कुछ समय से जिज्ञासु पाठकों द्वारा अन्य साहित्यों की भी मांग की जा रही है। जिनमें कुछ साहित्य अनार्षकोटि का तथा कुछ अन्य मतों व मान्यताओं पर भी आधारित है। ऐसे अनेकों शोधार्थी हैं जिन्हें आर्ष […]

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आश्रम-व्यवस्था

आश्रम-व्यवस्था वेद ने मनुष्य-जीवन को चार भागों में व्यक्त किया है।वे भाग हैं-ब्रह्मचर्य आश्रम,गृहस्थ आश्रम,वानप्रस्थ आश्रम और सन्यास आश्रम। आश्रम को आश्रम इसलिए कहा जाता है कि उसमें व्यक्ति पूर्णतया श्रम करता है और अपने जीवन को सफल बनाता है।मनुष्य जीवन की सफलता इसी बात पर आधारित है कि वह चारों आश्रमों में परिश्रम करे। […]

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वैदिक धर्म में तलाक नहीं हो सकता

वैदिक धर्म में तलाक नहीं हो सकता वैदिक धर्म में तलाक की भी जगह नहीं हैं। वर-वधू को विवाह से पूर्व भली-भाँति देख-भाल और पड़ताल करके अपना साथी चुनने का आदेश दिया गया है – खूब अच्छी तरह परख कर अपना साथी चुनो। पर जब एक बार विवाह हो गया तो फिर विवाह टूट नहीं […]

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ईश्वरीय-ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में आना चाहिये

ईश्वरीय-ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में आना चाहिये परमेश्वर सब मनुष्यों के माता-पिता हैं। वे सभी मनुष्यों का कल्याण चाहते हैं । अतः परमेश्वर द्वारा जो ज्ञान दिया जायेगा वह सृष्टि के आदि [आरंभ] में दिया जायेगा। जिस से सृष्टि के आदि के लोग भी लाभ उठा सके और उन के पीछे आने वाले अन्य लोग […]

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वर्ण-व्यवस्था:

वर्ण-व्यवस्था: संसार में अनेक जातियाँ हैं, जैसे: मनुष्य, पशु, पक्षी, सरीसृप, वृक्ष आदि। जब वृक्षों, पक्षियों, पशुओं, मछली आदि जलचरों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं, तो ऐसा कैसे हो सकता है, की मनुष्य जाति में भी अनेक वर्ण ना पाए जायें ? आम का वृक्ष एक भिन्न जाति का होता है, किन्तु इस आम […]

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ईश्वर स्तुति

ईश्वर स्तुति वेदों में अनेक मन्त्र हैं, जिनमें परमात्मा की स्तुति, प्रार्थना और उपासना का उपदेश है. आइये पहले इसके अर्थों पर मनन करें। स्तुति: ईश्वर के गुणों का चिन्तन करना, ईश्वर में प्रीति, उसके गुण, कर्म, स्वभाव से अपने गुण, कर्म, स्वभाव का सुधारना। स्तुति 2 प्रकार की होती है:१) सगुण स्तुति : ईश्वर […]

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दान / Donation

दान / Donation दान का महत्त्व समाज में वही है जो शरीर में रक्त का है। यदि शरीर में रक्त की कमी हो जाए तो शरीर दुर्बल हो जाता है और उसे भिन्न-भिन्न प्रकार के विकार, रोग लग सकते है। इसी प्रकार समाज में दान के अभाव में कार्य करने वाली सामाजिक संस्थाएँ निर्बल हो […]

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