Vedrishi |

आत्मनिरीक्षण

आत्मनिरीक्षण यन्मे छिद्रं चक्षुषो हृदयस्य मनसो वातितृण्णंबृहस्पतिर्मे तद्दधातु ।शन्नो भवतु भुवनस्य यस्पतिः ।।यजुर्वेद ३६/२ भावार्थ – हे जीवन दाता ! मैंने गीता , रामायण , दर्शन , उपनिषद् , वेद आदि ग्रन्थों को पढ़ा , किन्तु मन की पुस्तक को तो कभी खोलकर देखा ही नहीं । मन में उठने वाली अनिष्ट पापवृत्तियों की ओर […]

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