भारतीय रियासतों की अंग्रेजों से संधियाँ (राजपूताना खंड) – Bhartiya Riyasaton Angrejo Sandhiyan
बहुत सी सन्धियाँ लेन-देन, मर्यादाओं के निर्धारण सहित विश्वास के आधार पर होती थी और वे लिखित हों, यह बहुत आवश्यक नहीं माना जाता होगा। लेखन की विविध विधाओं की सूचनाओं और प्रारूपों के संग्रह लेखपद्धति में जितने प्रकार के पत्रों के प्रारूप मिलते हैं, उनमें किसी समझौता -पत्र का उदाहरण नहीं है जबकि सन्धिविग्रह के प्रति लिखे जाने वाले पत्र के प्रारूप मिलते हैं। ये पत्र राजकीय या प्रशासनिपेक्षाओं के सूचक होते हैं। सान्धिविग्रहिक को राजाज्ञा लिखित में प्रेषित की जाती थी और वह तदनुसार ही अपेक्षित कार्य करने का प्रयास करता था। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ऐसे पत्र समय-समय पर व्यवहार में रहे होंगे। अन्य विविध पत्रों के प्रारूप हमें ‘राजतरंगिणी’, दलपतिराय के ‘प्रशस्तिरत्नकोश’ और विद्यापति की ‘लिखनावली’ आदि में मिलते हैं।‘प्रशस्तिप्रकाशिका’ का भी अपना महत्व है।
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