Vedrishi

Free Shipping Above 1000 On All Books | 5% Off On Shopping Above 10,000 | 15% Off On All Vedas,Darshan, Upanishad | 10% Off On Shopping Above 25,000 |
Free Shipping Above 1000 On All Books | 5% Off On Shopping Above 10,000 | 15% Off On All Vedas,Darshan, Upanishad | 10% Off On Shopping Above 25,000 |

लिङ्गमहापुराणम्

Lingmahapuranam

1,025.00

SKU field_64eda13e688c9 Category puneet.trehan
भारतीय नव संवत्सर के उपलक्ष्य में 20% न्यून मूल्य पर पुस्तकें उपलब्ध
Subject : Lingpuranam
Edition : 2021
Publishing Year : 2012
SKU # : 37271-CK00-SH
ISBN : 9788170802881
Packing : Hard Cover
Pages : 933
Dimensions : 25.5 CM X 19 CM
Weight : 1620
Binding : Hard Cover
Share the book

इसी महापुराण के उत्तर भाग में लिखा गया है कि इस पुराण की रचना स्वयं ब्रह्मा जी ने की थी। उन्होंने कहा था कि इस पुराण को जो व्यक्ति आदि से अन्त तक पढ़े या सुने या ब्राह्मणों को सुनावे, उसको तप, यज्ञ, दान आदि से जो फल मिलता है उसके बराबर फल प्राप्त होता है और अन्त में उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है। उसके वंश में कोई मूर्ख और प्रमादी नहीं होता है।

ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्मा द्वारा रचित यह महापुराण पहले बहुत बड़ा था। बाद में कृष्षाद्वैपायन व्यास (महर्षि व्यास) जी ने इसका नये सिरे से संपादन किया। वर्तमान रूप में जो लिगमहापुराण उपलब्ध है इसका स्थायी रूप चौथी शताब्दी ईस्वी में हुआ ऐसा विद्वान लोग मानते हैं और महर्षि व्यास को ही इसका रचयिता भी मानते हैं। प्रकाशित सभी संस्कारणों में कृष्णद्वैपायन व्यास या महर्षि व्यास प्रणीतम् या प्रोक्तम् छपा हुआ मिलता है। अतः इस महापुराण के रचयिता महर्षि व्यास जी ही मान्य है।

नामकरण

इस महापुराण का नाम लिंगमहापुराण है। यह नामकरण क्यों किया गया इसका कारण यह है कि मुख्य रूप से इसमें लिंग के विषय में वर्णन किया गया है। यह महापुराण शैव पुराण है। शैव सम्प्रदाय में लिग की पूजार्चना और उपासना की जाती है। शिव के भक्त को शैव कहते हैं। उनके सम्प्रदाय को शैव सम्प्रदाय कहा जाता है। इस पुराण में लिग की उत्पति कैसे हुई, उसका परिचय उसके दार्शनिक सिद्धान्त, लिग के म्यूल और सूक्ष्म रूप, उसके पूजन की धार्मिक विधियों और उसके फल का वर्णन मुख्य है। अतः इस पुराण को लिग महापुराण नाम दिया गया है।

Weight 6415688 g

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Lingmahapuranam”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recently Viewed

You're viewing: Lingmahapuranam 1,025.00
Add to cart
Register

A link to set a new password will be sent to your email address.

Your personal data will be used to support your experience throughout this website, to manage access to your account, and for other purposes described in our privacy policy.

Lost Password

Lost your password? Please enter your username or email address. You will receive a link to create a new password via email.

Close
Close
Shopping cart
Close
Wishlist