Vedrishi

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मौलिक मनुस्मृति

Maulik (Original) Manusmriti

200.00

SKU field_64eda13e688c9 Category Rishi Dev
Subject : Smriti
Edition : 2024
Publishing Year : 2024
ISBN : 9788196947804
Pages : 440
Dimensions : 20X24X6
Weight : 800
Binding : Hard Cover
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“मौलिक मनुस्मृति” भारतीय धर्मशास्त्र का एक प्राचीन एवं प्रमाणिक ग्रन्थ है। इसे मनु ऋषि द्वारा प्रणीत माना जाता है। यह ग्रन्थ मानव जीवन के विविध आयामों – धर्म, सामाजिक व्यवस्था, आचार-व्यवहार, न्याय, नीति, शिक्षा एवं दायित्व – पर प्रकाश डालता है। इस संस्करण की विशेषता यह है कि इसमें— प्रक्षिप्त श्लोकों को हटाकर केवल मौलिक श्लोकों को ही प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक श्लोक का हिन्दी पद-पद अर्थ दिया गया है जिससे पाठक आसानी से अर्थ समझ सके। डॉ. सुरेन्द्रकुमार ने इस पर गहन अनुसंधान, भाष्य और समीक्षा प्रस्तुत की है। 👉 यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों, अध्येताओं तथा धर्मशास्त्र के गम्भीर अध्ययन करने वालों के लिए अत्यन्त उपयोगी है। 👉 जो पाठक मनुस्मृति के प्रामाणिक, शुद्ध और सरल हिन्दी अनुवाद की खोज में हैं, उनके लिए यह ग्रन्थ एक विश्वसनीय कृति है।

महर्षि दयानन्द के ग्रन्थों का अध्ययन करते हुए ऋषि द्वारा उधृत मनुस्मृति के श्लोकों में बहुत सी गम्भीर, महत्त्वपूर्ण, अनुपम बातें मिलीं, जिन्होंने मेरे चित्त पर अपनी महत्ता की छाप छोड़ी और मेरे ऊँचे संस्कार बनाये। मैंने मनुस्मृति को गुरुमुख से भी पढ़ा है और इसका स्वयं भी स्वाध्याय किया है। मेरी इस ग्रन्थ के प्रति अत्यन्त श्रद्धा थी, इसलिए मेरी यह प्रबल इच्छा रही कि ट्रस्ट की ओर से मनुस्मृति का प्रकाशन किया जाये। लेकिन मनुस्मृति में विद्यमान प्रक्षेपों ने मेरी इच्छा को साकार नहीं होने दिया। एक महान् तत्त्वद्रष्टा ऋषि के अनुपम ग्रन्थ को प्रक्षेपों ने विकृत कर रखा है, अतः प्रक्षेपयुक्त मनुस्मृति का प्रकाशन करना मनुस्मृति के प्रति अश्रद्धा बढ़ाना और उसके महत्त्व को कम करना है, यह अनुभव करते हुए अभी तक ट्रस्ट की ओर से मनुस्मृति का प्रकाशन नहीं कराया गया था। हमारे ट्रस्ट का उद्देश्य आर्ष साहित्य का प्रचार करना है। महर्षि दयानन्द ने मनुस्मृति को आर्ष ग्रन्थ घोषित करते हुए प्रक्षेपरहित को प्रामाणिक माना है। पर्याप्त समय से मनुस्मृति का विशुद्ध संस्करण प्राप्त करने की मेरी उत्कट इच्छा रही है। प्रक्षेपरहित विशुद्ध हस्तलेख प्राप्त करने के लिए भी हमने बड़ा भारी प्रयत्न किया और पर्याप्त धनराशि भी उसके लिए व्यय की, किन्तु कोई सफलता नहीं मिली।

अन्य प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित प्रक्षेपरहित मनुस्मृति को भी प्रकाशित करने का विचार मन में आया, किन्तु अब तक किये प्रक्षेपों के कार्य को देखकर मन सन्तुष्ट नहीं हुआ, क्योंकि विद्वानों ने प्रक्षेपों का अनुसन्धान करने के लिए न तो कोई ‘तटस्थ आधार’ या ‘मानदण्ड’ रखे हैं और न उस कार्य में एकरूपता है। वह कार्य मनमानी-सा लगता है। मैं चाहता था कि स्वयं ‘मनुस्मृति’ नामक कृति के अनुसार ही कुछ ‘नियम’ या ‘आधार’ निश्चित करके प्रक्षेपों का अनुसन्धान किया जाये, जो आधार सर्वसामान्य हों और जिनमें पूर्वाग्रहबद्धता न हो, जिससे पाठकों के मन पर यह प्रभाव पड़े कि वह कार्य मनमाने ढंग से नहीं किया गया है, अपितु नियमबद्ध एवं तटस्थ रूप से किया गया है।

Weight 6415688 g

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