पुस्तक का नामः – ऋग्वेदादिभाष्य भूमिका
लेखकः – महर्षि दयानंद
वेद ईश्वरीय ज्ञान है. आधुनिक युग में यदि वेद के प्रति अपने जीवन को समर्पित किया है तो प्रथम नाम स्वामी दयानन्द सरस्वती का ही आयेगा। वैदिक विचार धारा की शिक्षाओं का स्रोत वेद ही हैं. स्वामी जी ने जब वेदों का भाष्य करना चाहा तो उससे पहले, वेद के मानक सिद्धान्तों का प्रतिपादन करना अनिवार्य समझा। महर्षि ने इस उद्देश्य को सामने रखते हुए ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ का प्रणयन किया. दुसरे शब्दों में हम कह सकते हैं ऋषि दयानन्द ने वेदों के अर्थ रूपी ताले को खोलने के लिए हमें कुंजी रूप में ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ प्रदान की. इसीलिए ऋषि ने अपने जीवन में वेदभाष्य लेने वाले के लिए ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ साथ में लेने को अनिवार्य बताया।
Hard Cover455 PagesEdition 2020In StockOriginal Publisher Edition
Frequently Asked Questions
इस पुस्तक का बाइंडिंग, पेज, संस्करण और वज़न क्या है?
बाइंडिंग: Hard Cover | पृष्ठ: 455 | संस्करण वर्ष: 2020 | वज़न: लगभग 570 ग्राम। यह जानकारी उत्पाद पृष्ठ पर दर्ज वास्तविक विवरण पर आधारित है।
इस पुस्तक के लेखक कौन हैं?
लेखक: Swami Dayanand Sarswati (स्वामी दयानन्द सरस्वती )। लेखक की अन्य पुस्तकें भी Vedrishi पर उपलब्ध हैं।
प्रकाशक कौन सा है?
प्रकाशक: Vijaykumar Govindram Hasanand। यह पुस्तक Vedrishi ऑनलाइन वेदिक बुक स्टोर से उपलब्ध है।
इस पुस्तक का ऑनलाइन मूल्य क्या है?
इस पुस्तक का वर्तमान ऑनलाइन मूल्य ₹200 है। मूल्य और उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है; कृपया ऑर्डर से पहले उत्पाद पृष्ठ पर अद्यतन मूल्य देखें।
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