Vedrishi

ऋषि दयानन्द और आर्य समाज (2 भागों में) 

Rishi Dayanand Aur Arya samaj

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Subject : Dayanand arya samaj 
Edition : N/A
Publishing Year : N/A
SKU # : 37125-PP00-0H
ISBN : N/A
Packing : Paperback
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पुस्तक का नाम ऋषि दयानन्द और आर्य समाज (2 भागों में)
सम्पादक का नाम डॉ. ज्वलन्त कुमार शास्त्री

वेद विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है। जिन ऋषियों ने वैदिक ऋचाओं का दर्शन किया, वे साक्षात्कृतधर्मा ऋषि यह घोषणा करते हैं कि इन ऋचाओं का उन्होनें स्वयं आविष्कार नहीं किया है, यह उनके आगे पुरुष-प्रयत्न के विना प्रकटीभूत ज्ञान है। वैदिक ज्ञान के उपदेष्टा ऋषियों की परम्परा ब्रह्मा से लेकर महाभारतकालीन जैमिनि ऋषि पर्यन्त है। वेदों के यथार्थ स्वरुप के परिज्ञान के लिए ऋषियों की दृष्टि से वैदिक वाङ्मय को देखना होगा। आधुनिक काल के वैदिक ऋषि स्वामी दयानन्द सरस्वती की यह अपूर्व देन है कि उन्होनें वैदिक ऋचाओं के मर्म अथवा हार्द को समझने के लिए आर्ष ग्रन्थों का अवलम्बन लिया। ऐतरेय, याज्ञवल्क्य, गोपथ, कपिल, कणाद, गोतम, व्यास, जैमिनि, यास्क, मनु, पाणिनि और पतञ्जलि प्रभृति ऋषियों के वैदिक व्याख्या ग्रन्थ शाखा-ब्राह्मण-आरण्यक-उपनिषद्-दर्शनशास्त्र-वेदाङ्ग-उपाङ्ग की सहायता से ऋषि ने वैदिक मन्त्रों का स्वारस्य हमारे समक्ष प्रकट किया। महाभारत के पश्चात् वैदिक धर्म सिद्धान्तों और मान्यताओं का प्रस्फुटन ऋषि दयानन्द के सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, परिष्कारविधि प्रभृति ग्रन्थों में हुआ है। ऋषि दयानन्द के पश्चात् आर्य समाज के अनेकों विद्वानों ने लेखन और शास्त्रार्थ द्वारा वैदिक सिद्धान्तों का मंड़न किया।

प्रस्तुत पुस्तकें दो भागों में विभक्त है। इन पुस्तकों में विविध अध्यायों का संकलन किया गया है। प्रथम भाग में षड्दर्शन और स्वामी दयानन्द के दर्शन में अनादि तत्त्व का दर्शन प्रस्तुत किया गया है। इसमें मुक्ति और मोक्ष के सिद्धान्त का तथा इस सम्बन्ध में विविध भारतीय और अभारतीय मतों के सिद्धान्तों की समीक्षा की गई है। परिष्कार और पुनर्जन्म विषयक अध्याय को इसी भाग में सम्मलित किया गया है। सांस्कृतिक के सम्बन्ध में ऋषि दयानन्द के विचारों का उल्लेख किया गया है। ऋषि दयानन्द और आर्य समाज के दलितोद्धार और महिलासशक्तिकरण के लिए किये गये कार्यों का उल्लेख किया गया है। मुर्तिपूजा और फलित ज्योतिष की हानियों का वर्णन किया गया है। आर्य समाज के क्रान्तिकारियों का वर्णन किया गया है। ऋषि दयानन्द के क्रान्तिकारी विचारों का संकलन किया गया है। इसी प्रकार कई विषयों पर इस भाग में अनेकों अध्याय लिखे गये है।
द्वितीय भाग में ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज पर विविध प्रसिद्ध विद्वानों और शोधार्थियों के लेख प्रस्तुत किये गये हैं।
जैसे कि श्री अरविन्द, श्री रोमां रोला, डॉ. जे.टी.एफ.जार्डन्स, स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती जी, डॉ.रघुवंश जी, डॉ. रामधारी सिंह दिनकर जी, श्री विष्णु प्रभाकर जी, आचार्य चतुरसेन जी, श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी, जी.पी. भट्टाचार्य जी, प्रो. धनपति पाण्डेय, प्रा. राजेन्द्र जिज्ञासु जी, ड़ॉ. भवानीलाल भारतीय, डॉ. ज्वलनकुमारशास्त्री, डॉ.प्रमा शास्त्री, डॉ. प्रचेतस् आदि के विविध लेखों का संग्रह है।

ये पुस्तकें स्वामी दयानन्द और आर्यसमाज के समाज और देश के लिए किये गये कार्यों का परिचय करवाने के लिए अत्यन्त ही उपयोगी एवं लाभदायक है।

 

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