Vedrishi

संस्कृत साहित्य का प्रमाणिक इतिहास

Sanskrit Sahitya ka Pramanik Itihas

250.00

SKU N/A Category puneet.trehan
Subject : sanskrit sahity, history, iihas
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पुस्तक का नाम संस्कृत साहित्य का प्रामाणिक इतिहास

लेखक का नाम डॉ. रमाशङ्कर त्रिपाठी

संस्कृत साहित्य के इतिहास का अनुशीलन देश की गौरवमयी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति का परिशीलन है। इस दृष्टि से संस्कृत साहित्य भारत के गौरवशाली अतीत का मणि मण्डित मुकुर है। भारत के अतीत का जैसा साङ्गोपाङ्ग चित्रण संस्कृत के ग्रन्थों में उपलब्ध होता है वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। भारत के भव्य भविष्य के उत्कर्ष के लिये प्रामाणिक संस्कृत साहित्य का अध्ययन नित्तान्त अपेक्षित है। यथार्थ अतीत के अभाव में भविष्य की सुदृढ़, सुघटित एवं सुन्दर आधारशिला ही नहीं रक्खी जा सकती है। इसके अतिरिक्त दूसरी बात यह भी थी कि संस्कृत साहित्य का इतिहास हमारे परीक्षाओं में एक पत्र के रुप में निर्धारित है। इसके लिए भी संस्कृत साहित्य के इतिहास के अध्ययन की आवश्कता है।

प्रस्तुत पुस्तक संस्कृत साहित्य का प्रामाणिक इतिहास मुख्यतः प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रत्याशियों के लिए ध्यान में रखकर लिखी गई है। इस पुस्तक में तीन खण्ड़ है जिनमें प्रथमखण्ड़ में संस्कृत साहित्य का परिचय दिया गया है। इसी खण्ड़ के द्वितीय अध्याय में रामायण और रामायण की विविध टीकाऐं, रामायण के आधार पर रचित अन्य रामायणों का परिचय दिया गया है। रामायण के समान ही महाभारत पर भी द्वितीय अध्याय में लिखा गया है।

द्वितीय खण्ड़ में पाणिनि, वररुचि, पतञ्जलि, अश्वघोष आदि के साहित्यों का परिचय दिया गया है। इसी खण्ड़ के तृतीय अध्याय में कालिदास के काव्यों की काव्य सौन्दर्य पर विचार किया गया है। कालिदास के समान ही भारवि, भट्टी, कुमारदास, माद्य आदि का वर्णन है। इस खण्ड़ के पञ्चम अध्याय में अभिनन्द, अमरचन्द सूरि, रत्नाकर, क्षेमेन्द्र, श्रीहर्ष और चार्वाक, जैन आदि साहित्यकारों का परिचय दिया है। इस खण्ड़ के षष्ठम् अध्याय में ऐतिहासिक और अष्टम में गीतिकाव्यों का परिचय है। अष्टम् अध्याय में संस्कृत के गद्य साहित्य तथा चम्पूसाहित्य का वर्णन है। जिसमें सुबन्धु, बाणभट्ट, कालिदास, मुरारि आदि की रचनाओं का परिचय दिया हुआ है।

पुस्तक में दो परिशिष्ट भी सम्मलित किये गये हैं जिनमें प्रथम परिशिष्ट में ग्रन्थानामनुक्रमणी और द्वितीय परिशिष्ट में विविध प्रश्न रखे गये हैं जो कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में दिये जाते हैं। इन सभी प्रश्नों को उत्तर सहित इस परिशिष्ट भाग में रखा गया है।

आशा है कि यह ग्रन्थ मनीषियों, विद्वानों, विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रत्याशियों के लिए अत्यन्त लाभदायक होगा।

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