श्री स्वामी ब्रहामुनि जी सचमुच ब्रह्मज्ञान के मननकर्ता हैं। वेद और आर्ष ग्रन्थों के स्वाध्याय का स्वाद वे अकेले नहीं लेते. प्रत्युत दूसरों को भी उसमें सम्मिलित करते हैं। इससे पूर्व स्वामीजी महाराज तैंतीस ग्रन्थों द्वारा अपने स्वाध्याय का रसास्वादन जनता को करा चुके हैं। यह चौतीसवां ग्रन्थ योग विषयक है। स्वामी जी ने इस ग्रन्थ में महर्षि पतंजलि जी के योगसूत्रों का अर्थ और उनकी व्याख्या के साथ सूत्रों पर सर्वसम्मत् प्रामाणिक व्यासकृत भाष्य का भी भाषानुवाद दे दिया है।
Papercover192 PagesEdition 2018ISBN 9788170772743In StockOriginal Publisher Edition
Frequently Asked Questions
इस पुस्तक का बाइंडिंग, पेज, संस्करण, ISBN और वज़न क्या है?
बाइंडिंग: Papercover | पृष्ठ: 192 | संस्करण वर्ष: 2018 | ISBN: 9788170772743 | वज़न: लगभग 215 ग्राम। यह जानकारी उत्पाद पृष्ठ पर दर्ज वास्तविक विवरण पर आधारित है।
इस पुस्तक के लेखक कौन हैं?
लेखक: Swami Brahmamuni Parivrajak (स्वामी ब्रह्ममुनि परिव्राजक)। लेखक की अन्य पुस्तकें भी Vedrishi पर उपलब्ध हैं।
प्रकाशक कौन सा है?
प्रकाशक: Vijaykumar Govindram Hasanand। यह पुस्तक Vedrishi ऑनलाइन वेदिक बुक स्टोर से उपलब्ध है।
इस पुस्तक का ऑनलाइन मूल्य क्या है?
इस पुस्तक का वर्तमान ऑनलाइन मूल्य ₹125 है। मूल्य और उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है; कृपया ऑर्डर से पहले उत्पाद पृष्ठ पर अद्यतन मूल्य देखें।
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