महाराणा प्रताप का नाम बहादुर राजाओं की सूची जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान देकर इस देश के राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा की। महाराणा प्रताप के शासनकाल के समय दिल्ली में अकबर मुगल शासक था। उसकी नीति अन्य राजाओं को अपने नियंत्रण में लाने के लिए हिंदू राजाओं की ताकत का उपयोग करना था। कई राजपूत राजाओं ने अपनी गौरवशाली परंपराओं को त्यागते हुए अपनी बेटियों और बहुओं को पुरस्कार व सम्मान पाने के उद्देश्य से अकबर के हरम में भेजा।
महाराणा प्रताप की एकमात्र चिंता अपनी मातृभूमि को मुगलों के चंगुल से तुरंत मुक्त करना था। इसलिए उन्होंने घोषणा की कि, ‘मैं शपथ लेता हूँ कि जब तक चित्तौड़ को मुक्त नहीं करा लेता, तब तक सोने-चाँदी की प्लेटों में भोजन नहीं करूँगा, नरम बिस्तर पर नहीं सोऊँगा और महल की बजाय पत्ता-थाली पर खाना खाऊँगा, फर्श पर सोऊँगा और झोंपड़ी में रहूँगा। मैं तब तक दाढ़ी नहीं बनाऊँगा, जब तक चित्तौड़ को मुक्त नहीं कर दिया जाता।” –
22,000 सैनिकों की महाराणा प्रताप की सेना हल्दीघाट में अकबर के 2,00,000 सैनिकों के सामने आ डटी। उनके वफादार घोड़े चेतक ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर अपने स्वामी की जान बचा ली और स्वयं अमर हो गया। महाराणा प्रताप पहाड़ों, जंगलों और घाटियों में भटकते रहे। भामाशाह ने उनकी मदद की। महाराणा प्रताप ने मेवाड़ को बचाने के लिए 12 साल तक संघर्ष किया। उन्होंने बहुत कष्ट झेला, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं किया।
एक महायोद्धा की अविस्मरणीय गाथा।
Mahaparakrami Maharana Pratap – by Acharya Mayaram Patang(आचार्य मायाराम पतंग )
महापराक्रमी महाराणा प्रताप
Mahaparakrami Maharana Pratap – by Acharya Mayaram Patang(आचार्य मायाराम पतंग )
₹300.00
Subject : Mahaparakrami Maharana Pratap
Edition : 2021
Publishing Year : 2021
SKU # : 37527-PP02-0H
ISBN : 9788194444091
Packing : Hardcover
Pages : 136
Dimensions : 14X22X6
Weight : 284
Binding : Hardcover
Description
Hardcover136 PagesEdition 2021ISBN 9788194444091In StockOriginal Publisher Edition
बाइंडिंग: Hardcover | पृष्ठ: 136 | संस्करण वर्ष: 2021 | ISBN: 9788194444091 | वज़न: लगभग 284 ग्राम। यह जानकारी उत्पाद पृष्ठ पर दर्ज वास्तविक विवरण पर आधारित है।
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