Vedrishi

वैदिक चिन्तन की नई दिशा

Vedic Chintan Ki Nai Disha – by Dr. Surendera Kumar (डॉ. सुरेन्द्र कुमार )

₹130.00

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Subject : Vedic Chintan Ki Nai Disha
Edition : 2021
Publishing Year : N/A
SKU # : 37468-DP00-SH
ISBN : N/A
Packing : N/A
Pages : 248
Dimensions : N/A
Weight : NULL
Binding : Paperback
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पुस्तक एक : चिन्तन अनेक

‘वैदिक चिन्तन की नयी दिशा’ नामक यह उपयोगी पुस्तक पाठकों को सौंपते हए मुझे प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। इसमें वैदिक शास्त्र, वैदिक इतिहास, वैदिक महापुरुष, वैदिक समाज अर्थात् आर्यसमाज और वर्तमान हिन्दू समाज जो कि परम्परा से वैदिक समाज से ही सम्बद्ध है, उससे सम्बन्धित विभिन्न बिन्दुओं पर प्रेरक और विचारणीय नवीन चिन्तन प्रस्तुत किया है।

इस पुस्तक में लेखक ने अनेक भ्रान्तियों का तर्कपूर्ण समाधान उपस्थित किया है और शोध आधारित नये उत्तर प्रस्तुत किये हैं। हमारे जीवन में वेदों के महत्त्व को दर्शाते हुए पहली बार महाभारत में वर्णित धृतराष्ट्रगांधारी के सौ पुत्रों के ऐतिहासिक सच के रहस्य को इसमें उजागर किया है। इसी प्रकार योगदर्शन के व्यास-भाष्य में वर्णित चौदह भुवनों की पहचान करने का प्रयास किया है। डॉ. अम्बेडकरवादी आधुनिकजन उनके मनु और वर्णव्यवस्था विषयक समर्थक मूल मन्तव्यों को आजकल छिपा लेते हैं, अथवा प्रकट नहीं करते। लेखक ने प्रमाण सहित उन मन्तव्यों को पाठक के समक्ष रखा है। इसी प्रकार वैदिक धर्म, आर्य-द्रविण, आर्यो के उद्भव, प्रसार एवं इतिहास को लेकर पूर्वाग्रही पाश्चात्य लेखकों ने अनेक भ्रान्तियाँ फैला रखी है। लेखक ने इस पुस्तक में उन सब विषयों पर शोधपूर्ण तथ्य देकर उन सभी भ्रमों का निराकरण किया है। महर्षि वाल्मीकि, योग-दर्शन के रचयिता महर्षि पतंजलि, रामभक्त हनुमान, महात्मा बुद्ध आदि महापुरुषों के जीवन विषयक भ्रम लेखकों ने फैला रखे हैं। उन सबको दर करके उनके जीवन के वास्तविक तथ्यों से पाठकों को अवगत कराया गया है। आर्यसमाज एवं हिन्दूसमाज विषयक प्रेरक लेख भी इस पुस्तक में संकलित हैं। – – >

यह सभा की ‘परोपकारी’ पत्रिका में समय-समय पर प्रकाशित लेखक के महत्त्वपूर्ण लेखों का संग्रह है। इस कारण इसमें विविध विषयों का समावेश है। इस एक ही पुस्तक से पाठक अनेक विषयों के चिन्तन का लाभ उठा सकते हैं ।

Paperback248 PagesEdition 2021Original Publisher Edition

Frequently Asked Questions

इस पुस्तक का बाइंडिंग, पेज और संस्करण क्या है?
बाइंडिंग: Paperback | पृष्ठ: 248 | संस्करण वर्ष: 2021। यह जानकारी उत्पाद पृष्ठ पर दर्ज वास्तविक विवरण पर आधारित है।
इस पुस्तक के लेखक कौन हैं?
लेखक: Dr. Surendera Kumar (डॉ. सुरेन्द्र कुमार )। लेखक की अन्य पुस्तकें भी Vedrishi पर उपलब्ध हैं।
प्रकाशक कौन सा है?
प्रकाशक: Suruchi Prakashan-Delhi। यह पुस्तक Vedrishi ऑनलाइन वेदिक बुक स्टोर से उपलब्ध है।
इस पुस्तक का ऑनलाइन मूल्य क्या है?
इस पुस्तक का वर्तमान ऑनलाइन मूल्य ₹130 है। मूल्य और उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है; कृपया ऑर्डर से पहले उत्पाद पृष्ठ पर अद्यतन मूल्य देखें।
क्या Vedrishi से ऑर्डर ओरिजिनल पुस्तक मिलती है?
Vedrishi मूल प्रकाशकों की प्रामाणिक हिंदी और वैदिक पुस्तकें बेचता है। हर ऑर्डर नये कंडीशन में भेजा जाता है। किसी भी समस्या के लिए आप हमारे संपर्क पेज से सहायता ले सकते हैं।
Vedrishi से ऑर्डर करने के क्या लाभ हैं?
Vedrishi एक विशेषज्ञ हिंदी / वैदिक बुक स्टोर है जहाँ 1400+ पुस्तकें उपलब्ध हैं। हम प्रामाणिक प्रकाशकों की किताबें नए कंडीशन में भेजते हैं, आसान ऑनलाइन ऑर्डरिंग देते हैं, और ऑर्डर संबंधी सहायता के लिए व्हाट्सऐप / फ़ोन पर उपलब्ध रहते हैं। पेमेंट ऑनलाइन और सुरक्षित चैनलों से किया जा सकता है।
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